मैं रामू १८ साल का तंदुरुस्त जवान बेटा हु. हम लोग यूपी के गावं में रहते है. जब मैं १० साल का था, तो मेरी माँ का देहांत हो गया था. और पिताजी ने २२ साल की एक गरीब लड़की से दूसरी शादी कर ली. हम लोग खेतीबाड़ी करके अपना दिन गुजारते थे. मैंने ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं होने की वजह से घर पास की एक छोटी सी किराने की दूकान खोल की थी. पिता जी खेती पर जाते थे. मैं और मेरी सौतेली माँ दूकान पर बैठते थे. जब मैं १५ साल का था, तो पिता जी का अचानक देहांत हो गया. अब घर में केवल मैं और मेरी सौतली माँ रहते थे. मेरी सौतेली माँ को मैं माँ ही बोलता था. घर का एकलौता बेटा होने की वजह से माँ मुझसे प्यार काफी करती थी. मेरी माँ थोड़ी मोटी और सांवली है और उसकी उम्र ३१ साल की हो चुकी है. उसके चुतड काफी मोटे है और जब वो चलती है तो उसके चुतड हिलते है. उसके बूब्स भी बड़े-बड़े है. मैं कई बार उनको नहाते हुए देखा था.
पिता जी के देहांत के बाद, हम माँ-बेटे ही घर में रह गये थे और बहुत अकेलापन महसूस करते थे. दूकान में रहने के कारण हम लोग खेती नहीं कर पा रहे थे, तो हमने खेतो को ठेके पर दे दिया था. मैं दूकान जल्दी सुबह खोल देता हु और दोपहर को बंद कर देता हु. दोपहर का खाना घर पर खाकर और थोडा आराम करके फिर शाम से अँधेरा होने तक दूकान पर ही होता हु. माँ अब दूकान पर नहीं बैठती है, बस जब मैं दूकान का सामान लेने शहर जाता हु तभी वो दूकान संभालती है. एकदिन, जब मैं खाने के लिए दोपहर में घर गया तो मेरी माँ ने खाना परोसते हुए मुझसे पूछा – रामू बेटा, अगर तुम्हे ऐतराज़ ना हो, तो मैं अपनी माँ को यहाँ बुला लू. वो भी गावं में अकेले रहती है और हम लोगो का भी अकेलापन दूर हो जायेगा. मैने कहा – मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता है. आप बुला लीजिये.
अगले हफ्ते ही, नानी जी हम लोगो के यहाँ आ गयी. वो करीब ४५ साल की थी और उनके पति का देहांत ३ साल पहले हुआ था. नानी भी मोटी और सांवली थी और उनका बदन काफी सेक्सी था. जाड़े का समय था, इसलिए सुबह दूकान देरी से खुलती थी और शाम को जल्दी बाद कर देता था. घर पर माँ और नानी दोनों ही साड़ी और ब्लाउज पहनती थी और रात को सोते समय साड़ी खोल देती थी और केवल ब्लाउज और पेटीकोट पहनकर सोती थी. मैं सोते समय केवल अंडरवियर और लुंगी पहनकर सोता था. एक दिन सुबह मेरी आँख खुली, तो देखा नानी मेरे कमरे में थी और मेरी लुंगी की तरफ आँखे फाड़-फाड़ कर देख रही थी. मैने झट से आँखे बंद कर ली, वो समझ रही थी कि मैं अभी तक सो रहा हु. मैने महसूस किया, कि मेरा लंड खड़ा होकर अंडरवियर से बाहर निकला हुआ था और लुंगी थोड़ी सरकी हुई थी. इसलिए मेरा लंड एकदम काला लंड, करीब ८ इंच लम्बा और काफी मोटा है और नानी उसे आँख फाड़कर देंख रही थी.
कुछ देर इसी तरह देखने के बाद, वो कमरे से बाहर चली गयी. तब मैं उठ गया और अपने मोटे लंड को अपने अंडरवियर के अन्दर डाला. फिर मैं नहा-धोकर जब नाश्ता करने बैठा, तो उनकी नज़र मेरी लुंगी पर ही थी. शायद वो इस ताक में थी, कि मेरे लंड के दर्शन फिर से हो जाए. जाड़े के दिनों में हम दूकान १२ बजे के बाद ही खोलते थे. इसलिए मैं दूकान खुलने तक बाहर खाट में बैठ जाता और धुप का आनंद लेता. हमने बाहर एक पार्टीशन भी करवाया हुआ है, जिसमे हम लोग पेशाब करते है. थोड़ी देर बाद, मैने देखा कि नानी आई और पेशाब करने चली गयी. वो पार्टीशन में जाकर अपनी साड़ी और पेटीकोट कमर तक उठाया और इस तरह से बैठी, कि मुझे उनकी काली फांको वाली मस्त मोटी जाघो से घिरी चूत मुझे साफ़ दिखती रहे. नानी का सिर नीचे था और मेरी नज़र उनकी चूत पर थी. पेशाब करने के बाद नानी करीब ५-१० मिनट उसी तरह बैठी रही और अपने दाहिने हाथ से चूत को रगड़ने लगी. ये सब देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया. और जब नानी उठी, तो मैने नज़र घुमा ली. मेरे पास से गुजरते वक्त नानी ने पूछा – क्या आज दूकान नहीं खोलनी है? मैने कहा – बस नानी जी १० मिनट में जाकर दूकान खोलता हु. और मैं दूकान खोलने चला गया.
शाम को दूकान से जब घर आया, तो नानी फिर मेरे सामने पेशाब करने चली गयी और सुबह की तरह पेशाब करके अपनी चूत को रगड़ रही थी. थोड़ी देर बाद, मैं बाहर घुमने निकल गया. माँ बोली – बेटा जल्दी आ जाना. जाड़े का समय है. मैंने कहा, ठीक है माँ और मैं निकल गया. रास्ते में, मेरे दिमाग मैं केवल नानी की चूत ही घूम रही थी. मैं कभी-कभी एक पवयुआ देसी शराब पिया करता था. आदत तो नहीं थी, लेकिन महीने- २ महीने के एक-दो बार पी लिया करता था. आज दिमाग में केवल चूत ही चूत घूम रही थी और मैं पीने के लिए ठेके की तरफ चल पड़ा. पीने के बाद मैं घर की ओर निकल गया. मेरी माँ, मेरे पीने के बारे में जानती थी. तो उसने कुछ नहीं बोला. वैसे भी, मुझे पीने के बाद शांति से सोने के आदत थी, तो मैं किसी को परेशां नहीं करता था. रात को करीब ९ बजे हम सब ने मिलकर खाना खाया. खाना खाने के बाद, माँ घर के काम निपटाने लगी. मैं और नानी खाट पर बैठकर बातें करने लगे.
थोड़ी देर बाद, माँ भी आ गयी और बातें करने लगी. नानी ने कहा – चलो कमरे में चलते है, वहीँ बातें करेंगे. यहाँ काफी ठण्ड है. इसलिए हम कमरे सब में चले गये. माँ और नानी ने अपने बिस्तर जमीन पर लगाये और हम सब जमीन पर बैठकर बातें करने लगे. बातो ही बातो में नानी ने कहा – रामू आज तू हम लोगो के साथ हो सो जा. माँ बोली – लेकिन यहाँ कहाँ सोयेगा? और मुझे मर्दों के बीच में सोने में शर्म आती है और नीद भी नहीं आती है. नानी बोली – बेटी, क्या हुआ. ये भी तो हमारे बेटे ही जैसा है. हलाकि तू इसकी सौतेली माँ है, फिर भी इसका कितना ध्यान रखती है. अगर बेटा साथ सो जायेगा, तो इसमें शर्म की क्या बात है. ख़ैर नानी और माँ मान गये. मैं नानी और माँ के बीच में सो गया.
मेरे दाई तरफ माँ थी और बायीं तरफ नानी. शराब के नशे के कारण पता नहीं चला, कि मुझे कब नीद आ गयी. करीब १ बजे, मुझे पेशाब लगी, तो मेरी आँखे खुल गयी. मुझे अपने बगल से ह्ह्ह्हह्ह्हा ऊऊऊऊऊउ आआआआ की धीमी आवाज़े सुनाई दे रही थी. मैने महसूस किया, ये तो मेरी माँ की फुसफुसाहट है. इसलिए मैने धीरे से माँ की और देखा. माँ को देखकर मेरी आँखे खुली की खुली रह गयी. माँ अपने पेटीकोट को कमर के ऊपर तक करके बाए हाथ से अपनी चूत रगड़ रही थी और दाए हाथ की उंगलिया अपनी चूत में डालकर अन्दर-बाहर कर रही थी. इस तरह करीब वो १० मिनट के बाद, अपने पेटीकोट को नीचे करके सो गयी. शायद उनका पानी निकल गया था.
थोड़ी देर बाद मैं उठकर पेशाब करने चला गया और पेशाब करके वापस आके नानी और माँ के बीच में सो गया. अब मेरी नज़र बार-बार माँ की तरफ जा रही थी और मेरी आँखों से नीद कोसो दूर थी. इसलिए मैं नानी की तरह मुह कर लिया और सोने की कोशिश करने लगा. लेकिन, नीद मुझे फिर भी नहीं आ रही थी. क्युकि नानी की तरह मुह करने के कारण मुझे उनकी काली चूत बार-बार अपनी आँखों के सामने दिखाई देने लगी थी. इसी कशमकश में १ घंटा निकल गया. अचानक से मेरी नज़र नानी के चुतड पर पड़ी. मैने देखा कि उनका पेटीकोट घुटनों से थोडा ऊपर उठा हुआ था. अचानक मेरे शराबी दिमाग में एक आईडिया आया. मैं उठा और तेल की शीशी ले आया और नानी के पास मुह करके खूब सारा तेल मेरे सुपाड़े पर और लंड की जड़ तक लगा दिया. फिर धीरे-धीरे नानी के पेटीकोट को ऊपर उठा दिया. नानी का मुह दूसरी तरफ था, इसलिए मुझे उनकी चूत के दर्शन हो गये थे. मैने अपने लंड को तेल पिलाकर सिर्फ नानी की चूत के पास रखा और फिर महसूस किया, कि नानी अपनी गांड को हिलाकर अपनी चूत को मेरे लंड के पास कर रही थी. मैं समझ गया, कि नानी भी चुदने के फुल मूड में थी. इसलिए मैने भी अपनी कमरका धक्का उनकी चूत पर डाला, जिससे मेरे लंड का सुपाडा उनकी चूत में घुस गया. और उनके मुह से हलकी सी चीख निकल गयी आह्ह्ह्ह …… रामू आहिस्ता से डालो ना. क्यों की तुम्हारा लंड काफी बड़ा और मोटा है. और मैने भी सालो से चुदवाई नहीं है. बेटा धीरे से और आहिस्ता से करो. ये कहकर नानी सीधी लेट गयी और अपने पेटीकोट को कमर तक ऊँचा कर लिया. अब मैं नानी के ऊपर चढ़ गया और धीरे – धीरे अपना लंड घुसाने लगा. जैसे – जैसे मेरे लंड नानी की चूत के अन्दर जाता था वो uuuuuuuuuuhhhhhhffffff अहहहहः अहहहः की आवाज़ निकालती थी.
मैं जब अपना पूरा लंड नानी की चूत में डाल चूका था, तो मैने नानी की आँखों में आंसू देखे. मैने पूछा – क्या हुआ, आप रो क्यों रही हो? उन्होंने बोला – ये तो ख़ुशी के आंसू है. आज कितने बरसो बाद, मेरी चूत में लंड घुसा है. फिर मैं अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा और जोर – जोर से नानी नानी की चूत को छोड़कर फाड़ने लगा. नानी भी अपने चुतड उठाकर मेरा साथ दे रही थी. और बीच – बीच में कह रही थी – और जोर से चोदो, पुरे दम से चोदो, मेरी बरसो पुरानी हवस को पूरी तरह से बुझा दो. वाकई तुम्हारा लंड इंसान का नहीं है, घोड़े या गधे का लंड है. मैं करीब १५-२० मिनट तक उनकी चूत में अपने मोटे और तगड़े हथियार को अन्दर- बाहर करता रहा. इसी बीच मैने महसूस किया, कि माँ हमारी इस कामक्रीड़ा को अपनी बंद आँखों से देख रही थी और मन ही मन सोच रही थी, जब मेरी माँ अपने नातिन से चुदवा सकती है तो क्यों ना, मैं भाई बहती हुई गंगा में डुबकी लगा लू? कब तक मैं अपने हाथो का इस्तेमाल करती रहूंगी? आखिर ये मेरा सगा बेटा थोड़ी है.
और उठकर उसने अपना पेटीकोट खोल दिया और अपनी चूत नानी के मुह पर रख कर रगड़ने लगी. पहले तो नानी सकपका गयी, लेकिन जल्दी ही समझ गयी कि उसकी बेटी भी प्यासी है और अपने सौतेले बेटे का लंड खाना चाहती है. फिर नानी माँ की चूत में जीभ डालकर जीभ से चोदने लगी. इसी दरमियाँ नानी ३ बार झड़ चुकी थी और कहने लगी – बस रामू, अब बस. मुझ से और नहीं सहा जाता है. मैने कहा – बस नानी ५ मिनट और. ५ मिनट बाद, मैने मेरा सारा वीर्य नानी की चूत में झाड़ दिया.
अब नानी थक कर सो गयी थी. माँ ने कहा – चलो बिस्तर में चलते है. वहां तुम मुझे चोदना. हम दोनों बिस्तर पर आ गये. मेरा लंड अभी सिकुड़ा हुआ था. इसलिए माँ ने लंड को लेकर मुह में चोसना शुरू किया और मैं भी ६९ की पोजीशन मैं उनकी चूत चाटने लगा. हम दोनों करीब १० मिनट एकदूसरे को चूसते रहे और मेरा लंड विशालकाय हो गया. अब मैने माँ की गांड की नीचे तकिया लगाया और उनकी दोनों टांगो को मेरे कंधे पर रख कर लंड पेलने लगा. सुपाडे के अन्दर जाते ही वो बोली – हाय रे दैया, कितना मोटा लंड है तेरा. खूब मज़ा आएगा और फिर मैं माँ को जोर – जोर से चोदने लगा. वो भी ज्यादा बुड्डी ना होने के कारण, मेरा खूब साथ दे रही थी. पुरे कमरे में पच-पच की आवाज़े आ रही थी.
हम करीब १ घंटे कई स्टाइल में चुदाई करते रहे और लास्ट में, मैंने माँ की गांड भी मारी और माँ को बहुत मज़ा आया. अब रोज़ मैं दोपहर को नानी को चोदता हु (क्युकि, उम्र होने के कारण कभी – कभी साथ नहीं दे पाती है) और रात में माँ को मस्ती में चोदता हु. मैं अपने पानी को नानी और माँ की चूत में निकालता हु, क्युकि इस उम्र में नानी माँ नहीं बन सकती है और मेरी सौतली माँ बाँझ है और वो भी माँ नहीं बन सकती है तो मैं उन दोनों की दिन-रात चुदाई करके अपने लंड की प्यास को बुझाकर मज़े लेता हु.
पिता जी के देहांत के बाद, हम माँ-बेटे ही घर में रह गये थे और बहुत अकेलापन महसूस करते थे. दूकान में रहने के कारण हम लोग खेती नहीं कर पा रहे थे, तो हमने खेतो को ठेके पर दे दिया था. मैं दूकान जल्दी सुबह खोल देता हु और दोपहर को बंद कर देता हु. दोपहर का खाना घर पर खाकर और थोडा आराम करके फिर शाम से अँधेरा होने तक दूकान पर ही होता हु. माँ अब दूकान पर नहीं बैठती है, बस जब मैं दूकान का सामान लेने शहर जाता हु तभी वो दूकान संभालती है. एकदिन, जब मैं खाने के लिए दोपहर में घर गया तो मेरी माँ ने खाना परोसते हुए मुझसे पूछा – रामू बेटा, अगर तुम्हे ऐतराज़ ना हो, तो मैं अपनी माँ को यहाँ बुला लू. वो भी गावं में अकेले रहती है और हम लोगो का भी अकेलापन दूर हो जायेगा. मैने कहा – मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता है. आप बुला लीजिये.
अगले हफ्ते ही, नानी जी हम लोगो के यहाँ आ गयी. वो करीब ४५ साल की थी और उनके पति का देहांत ३ साल पहले हुआ था. नानी भी मोटी और सांवली थी और उनका बदन काफी सेक्सी था. जाड़े का समय था, इसलिए सुबह दूकान देरी से खुलती थी और शाम को जल्दी बाद कर देता था. घर पर माँ और नानी दोनों ही साड़ी और ब्लाउज पहनती थी और रात को सोते समय साड़ी खोल देती थी और केवल ब्लाउज और पेटीकोट पहनकर सोती थी. मैं सोते समय केवल अंडरवियर और लुंगी पहनकर सोता था. एक दिन सुबह मेरी आँख खुली, तो देखा नानी मेरे कमरे में थी और मेरी लुंगी की तरफ आँखे फाड़-फाड़ कर देख रही थी. मैने झट से आँखे बंद कर ली, वो समझ रही थी कि मैं अभी तक सो रहा हु. मैने महसूस किया, कि मेरा लंड खड़ा होकर अंडरवियर से बाहर निकला हुआ था और लुंगी थोड़ी सरकी हुई थी. इसलिए मेरा लंड एकदम काला लंड, करीब ८ इंच लम्बा और काफी मोटा है और नानी उसे आँख फाड़कर देंख रही थी.
कुछ देर इसी तरह देखने के बाद, वो कमरे से बाहर चली गयी. तब मैं उठ गया और अपने मोटे लंड को अपने अंडरवियर के अन्दर डाला. फिर मैं नहा-धोकर जब नाश्ता करने बैठा, तो उनकी नज़र मेरी लुंगी पर ही थी. शायद वो इस ताक में थी, कि मेरे लंड के दर्शन फिर से हो जाए. जाड़े के दिनों में हम दूकान १२ बजे के बाद ही खोलते थे. इसलिए मैं दूकान खुलने तक बाहर खाट में बैठ जाता और धुप का आनंद लेता. हमने बाहर एक पार्टीशन भी करवाया हुआ है, जिसमे हम लोग पेशाब करते है. थोड़ी देर बाद, मैने देखा कि नानी आई और पेशाब करने चली गयी. वो पार्टीशन में जाकर अपनी साड़ी और पेटीकोट कमर तक उठाया और इस तरह से बैठी, कि मुझे उनकी काली फांको वाली मस्त मोटी जाघो से घिरी चूत मुझे साफ़ दिखती रहे. नानी का सिर नीचे था और मेरी नज़र उनकी चूत पर थी. पेशाब करने के बाद नानी करीब ५-१० मिनट उसी तरह बैठी रही और अपने दाहिने हाथ से चूत को रगड़ने लगी. ये सब देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया. और जब नानी उठी, तो मैने नज़र घुमा ली. मेरे पास से गुजरते वक्त नानी ने पूछा – क्या आज दूकान नहीं खोलनी है? मैने कहा – बस नानी जी १० मिनट में जाकर दूकान खोलता हु. और मैं दूकान खोलने चला गया.
शाम को दूकान से जब घर आया, तो नानी फिर मेरे सामने पेशाब करने चली गयी और सुबह की तरह पेशाब करके अपनी चूत को रगड़ रही थी. थोड़ी देर बाद, मैं बाहर घुमने निकल गया. माँ बोली – बेटा जल्दी आ जाना. जाड़े का समय है. मैंने कहा, ठीक है माँ और मैं निकल गया. रास्ते में, मेरे दिमाग मैं केवल नानी की चूत ही घूम रही थी. मैं कभी-कभी एक पवयुआ देसी शराब पिया करता था. आदत तो नहीं थी, लेकिन महीने- २ महीने के एक-दो बार पी लिया करता था. आज दिमाग में केवल चूत ही चूत घूम रही थी और मैं पीने के लिए ठेके की तरफ चल पड़ा. पीने के बाद मैं घर की ओर निकल गया. मेरी माँ, मेरे पीने के बारे में जानती थी. तो उसने कुछ नहीं बोला. वैसे भी, मुझे पीने के बाद शांति से सोने के आदत थी, तो मैं किसी को परेशां नहीं करता था. रात को करीब ९ बजे हम सब ने मिलकर खाना खाया. खाना खाने के बाद, माँ घर के काम निपटाने लगी. मैं और नानी खाट पर बैठकर बातें करने लगे.
थोड़ी देर बाद, माँ भी आ गयी और बातें करने लगी. नानी ने कहा – चलो कमरे में चलते है, वहीँ बातें करेंगे. यहाँ काफी ठण्ड है. इसलिए हम कमरे सब में चले गये. माँ और नानी ने अपने बिस्तर जमीन पर लगाये और हम सब जमीन पर बैठकर बातें करने लगे. बातो ही बातो में नानी ने कहा – रामू आज तू हम लोगो के साथ हो सो जा. माँ बोली – लेकिन यहाँ कहाँ सोयेगा? और मुझे मर्दों के बीच में सोने में शर्म आती है और नीद भी नहीं आती है. नानी बोली – बेटी, क्या हुआ. ये भी तो हमारे बेटे ही जैसा है. हलाकि तू इसकी सौतेली माँ है, फिर भी इसका कितना ध्यान रखती है. अगर बेटा साथ सो जायेगा, तो इसमें शर्म की क्या बात है. ख़ैर नानी और माँ मान गये. मैं नानी और माँ के बीच में सो गया.
मेरे दाई तरफ माँ थी और बायीं तरफ नानी. शराब के नशे के कारण पता नहीं चला, कि मुझे कब नीद आ गयी. करीब १ बजे, मुझे पेशाब लगी, तो मेरी आँखे खुल गयी. मुझे अपने बगल से ह्ह्ह्हह्ह्हा ऊऊऊऊऊउ आआआआ की धीमी आवाज़े सुनाई दे रही थी. मैने महसूस किया, ये तो मेरी माँ की फुसफुसाहट है. इसलिए मैने धीरे से माँ की और देखा. माँ को देखकर मेरी आँखे खुली की खुली रह गयी. माँ अपने पेटीकोट को कमर के ऊपर तक करके बाए हाथ से अपनी चूत रगड़ रही थी और दाए हाथ की उंगलिया अपनी चूत में डालकर अन्दर-बाहर कर रही थी. इस तरह करीब वो १० मिनट के बाद, अपने पेटीकोट को नीचे करके सो गयी. शायद उनका पानी निकल गया था.
थोड़ी देर बाद मैं उठकर पेशाब करने चला गया और पेशाब करके वापस आके नानी और माँ के बीच में सो गया. अब मेरी नज़र बार-बार माँ की तरफ जा रही थी और मेरी आँखों से नीद कोसो दूर थी. इसलिए मैं नानी की तरह मुह कर लिया और सोने की कोशिश करने लगा. लेकिन, नीद मुझे फिर भी नहीं आ रही थी. क्युकि नानी की तरह मुह करने के कारण मुझे उनकी काली चूत बार-बार अपनी आँखों के सामने दिखाई देने लगी थी. इसी कशमकश में १ घंटा निकल गया. अचानक से मेरी नज़र नानी के चुतड पर पड़ी. मैने देखा कि उनका पेटीकोट घुटनों से थोडा ऊपर उठा हुआ था. अचानक मेरे शराबी दिमाग में एक आईडिया आया. मैं उठा और तेल की शीशी ले आया और नानी के पास मुह करके खूब सारा तेल मेरे सुपाड़े पर और लंड की जड़ तक लगा दिया. फिर धीरे-धीरे नानी के पेटीकोट को ऊपर उठा दिया. नानी का मुह दूसरी तरफ था, इसलिए मुझे उनकी चूत के दर्शन हो गये थे. मैने अपने लंड को तेल पिलाकर सिर्फ नानी की चूत के पास रखा और फिर महसूस किया, कि नानी अपनी गांड को हिलाकर अपनी चूत को मेरे लंड के पास कर रही थी. मैं समझ गया, कि नानी भी चुदने के फुल मूड में थी. इसलिए मैने भी अपनी कमरका धक्का उनकी चूत पर डाला, जिससे मेरे लंड का सुपाडा उनकी चूत में घुस गया. और उनके मुह से हलकी सी चीख निकल गयी आह्ह्ह्ह …… रामू आहिस्ता से डालो ना. क्यों की तुम्हारा लंड काफी बड़ा और मोटा है. और मैने भी सालो से चुदवाई नहीं है. बेटा धीरे से और आहिस्ता से करो. ये कहकर नानी सीधी लेट गयी और अपने पेटीकोट को कमर तक ऊँचा कर लिया. अब मैं नानी के ऊपर चढ़ गया और धीरे – धीरे अपना लंड घुसाने लगा. जैसे – जैसे मेरे लंड नानी की चूत के अन्दर जाता था वो uuuuuuuuuuhhhhhhffffff अहहहहः अहहहः की आवाज़ निकालती थी.
मैं जब अपना पूरा लंड नानी की चूत में डाल चूका था, तो मैने नानी की आँखों में आंसू देखे. मैने पूछा – क्या हुआ, आप रो क्यों रही हो? उन्होंने बोला – ये तो ख़ुशी के आंसू है. आज कितने बरसो बाद, मेरी चूत में लंड घुसा है. फिर मैं अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा और जोर – जोर से नानी नानी की चूत को छोड़कर फाड़ने लगा. नानी भी अपने चुतड उठाकर मेरा साथ दे रही थी. और बीच – बीच में कह रही थी – और जोर से चोदो, पुरे दम से चोदो, मेरी बरसो पुरानी हवस को पूरी तरह से बुझा दो. वाकई तुम्हारा लंड इंसान का नहीं है, घोड़े या गधे का लंड है. मैं करीब १५-२० मिनट तक उनकी चूत में अपने मोटे और तगड़े हथियार को अन्दर- बाहर करता रहा. इसी बीच मैने महसूस किया, कि माँ हमारी इस कामक्रीड़ा को अपनी बंद आँखों से देख रही थी और मन ही मन सोच रही थी, जब मेरी माँ अपने नातिन से चुदवा सकती है तो क्यों ना, मैं भाई बहती हुई गंगा में डुबकी लगा लू? कब तक मैं अपने हाथो का इस्तेमाल करती रहूंगी? आखिर ये मेरा सगा बेटा थोड़ी है.
और उठकर उसने अपना पेटीकोट खोल दिया और अपनी चूत नानी के मुह पर रख कर रगड़ने लगी. पहले तो नानी सकपका गयी, लेकिन जल्दी ही समझ गयी कि उसकी बेटी भी प्यासी है और अपने सौतेले बेटे का लंड खाना चाहती है. फिर नानी माँ की चूत में जीभ डालकर जीभ से चोदने लगी. इसी दरमियाँ नानी ३ बार झड़ चुकी थी और कहने लगी – बस रामू, अब बस. मुझ से और नहीं सहा जाता है. मैने कहा – बस नानी ५ मिनट और. ५ मिनट बाद, मैने मेरा सारा वीर्य नानी की चूत में झाड़ दिया.
अब नानी थक कर सो गयी थी. माँ ने कहा – चलो बिस्तर में चलते है. वहां तुम मुझे चोदना. हम दोनों बिस्तर पर आ गये. मेरा लंड अभी सिकुड़ा हुआ था. इसलिए माँ ने लंड को लेकर मुह में चोसना शुरू किया और मैं भी ६९ की पोजीशन मैं उनकी चूत चाटने लगा. हम दोनों करीब १० मिनट एकदूसरे को चूसते रहे और मेरा लंड विशालकाय हो गया. अब मैने माँ की गांड की नीचे तकिया लगाया और उनकी दोनों टांगो को मेरे कंधे पर रख कर लंड पेलने लगा. सुपाडे के अन्दर जाते ही वो बोली – हाय रे दैया, कितना मोटा लंड है तेरा. खूब मज़ा आएगा और फिर मैं माँ को जोर – जोर से चोदने लगा. वो भी ज्यादा बुड्डी ना होने के कारण, मेरा खूब साथ दे रही थी. पुरे कमरे में पच-पच की आवाज़े आ रही थी.
हम करीब १ घंटे कई स्टाइल में चुदाई करते रहे और लास्ट में, मैंने माँ की गांड भी मारी और माँ को बहुत मज़ा आया. अब रोज़ मैं दोपहर को नानी को चोदता हु (क्युकि, उम्र होने के कारण कभी – कभी साथ नहीं दे पाती है) और रात में माँ को मस्ती में चोदता हु. मैं अपने पानी को नानी और माँ की चूत में निकालता हु, क्युकि इस उम्र में नानी माँ नहीं बन सकती है और मेरी सौतली माँ बाँझ है और वो भी माँ नहीं बन सकती है तो मैं उन दोनों की दिन-रात चुदाई करके अपने लंड की प्यास को बुझाकर मज़े लेता हु.
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