Monday, February 6, 2017

भाभी ने मुझसे और भी कई तरीकों से .........

This is My first Experience with my "devar"..............in his own language in our Hindi Font for all Desi Lovers enjoy and Do post ur Lovely comments and also "CUM" harder......
उस समय तक मेरे लण्ड पर बाल उग आए थे। मैं अक्सर रात को अपने बिस्तर पर नंगा लेट कर अपने लण्ड के बालों को सहलाया करता था एवं अपने लण्ड को खड़ा कर उसे सहलाता रहता था।
एक रात मैं अपने लण्ड को सहला रहा था। उसमे मुझे बहुत आनंद आ रहा था। अचानक मैंने जोर जोर से अपने लण्ड को अपने हाथ से रगड़ना शुरू किया। मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लग रहा था। अचानक मेरे लण्ड से मेरा माल निकलने लगा। उत्तेजना से मेरी आँखे बंद हो गई। ५-६ मिनट तक मुझे होश ही नहीं रहा। ये मेरा पहला मुठ था। इसके पहले मुझे इसका कोई अनुभव नहीं था। मैंने बाथरूम में जा कर अपने लण्ड को धोया और बिस्तर पे आया तो मुझे गहरी नींद आ गई।
अगली सुबह मैं अपने कमरे से बाहर निकला तो देखा कि भइया अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रहे हैं। उनकी शादी हुए २ साल हो गए थे। भाभी मेरे साथ बहुत ही घुली मिली थी। मैं अपनी हर प्रोब्लम उनको बताया करता था। मेरे माता-पिता भी हमारे साथ ही रहते थे। थोड़ी देर में भईया अपने ऑफिस चले गए। पिता जी को कचहरी में काम था इस लिए वो १० बजे चले गए। मेरे पड़ोस में एक पूजा का कार्यक्रम था सो माँ भी वहां चली गई।
मैंने देखा कि घर में मेरे और भाभी के अलावा कोई नहीं है। मैं भाभी के कमरे में गया। भाभी अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी। मैं उनके बगल में जा कर लेट गया। मेरे लिए ये कोई नई बात नहीं थी। भाभी को इसमें कोई गुस्सा नहीं होता था। भाभी ने करवट बदल कर मेरी कमर के ऊपर अपना पैर रख कर अपना बदन का भार मुझे पे डाल दिया और कहा- क्या बात है राजा जो आप कुछ परेशान लग रहे हैं?
भाभी अक्सर मेरे साथ ऐसा करती थी।
मैंने कहा- भाभी कल रात को कुछ गजब हो गया, आज तक मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ था।
भाभी ने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- कल रात को मेरे लण्ड से कुछ सफ़ेद सफ़ेद निकल गया, मुझे लगता है कि मुझे डाक्टर के पास जाना होगा।
भाभी ने मुस्कुरा के पूछा- अपने आप निकल गया?
मैंने कहा- नहीं ! मैं अपने लण्ड को सहला रहा था तभी ऐसा हुआ।
भाभी ने कहा- राजा बाबू ! अब आप जवान हो गए हो, ये सब तो होगा ही ! लगता है कि मुझे देखना होगा।
भाभी ने अपना हाथ मेरे लण्ड के ऊपर रख दिया तथा धीरे धीरे इसे दबाने लगी। इससे मेरे लण्ड खड़ा होने लगा।
भाभी बोली- जरा दिखाइए तो सही !
मैं कुछ नहीं बोला। मैंने धीरे से अपने पैन्ट का बटन खोल दिया। भाभी ने मेरे पैन्ट को नीचे की ओर खींचा और उसे पूरी तरह उतार दिया। अब मैं सिर्फ़ अंडरवियर में था।
भाभी अंडरवियर के ऊपर से ही मेरा लण्ड को सहला रही थी, बोली- क्या इसी से कल रात को सफ़ेद सफ़ेद निकला था?
मैंने कहा- हाँ !
भाभी ने कहा- अंडरवियर खोलिए !
मैंने कहा- क्या भाभी जी ! आपके सामने मैं अपना अंडरवियर कैसे खोल सकता हूँ?
भाभी बोली- अरे जब आप मेरे को अपनी पूरी समस्या नहीं बतायेंगे तो मैं कैसी जानूंगी कि आपको क्या हुआ है? और मुझे क्या शरमाना? अपनों से कोई शरमाता है भला? जब आपके भइया को मेरे सामने अपने कपड़े खोलने में कोई शर्म नहीं है तो फिर आप क्यों शरमाते हैं?
मैं इस से पहले कि कुछ बोलता भाभी ने मेरा अंडरवियर पकड़ कर अचानक नीच खींच लिया। मेरा लण्ड तन के खड़ा हो गया।
भाभी ने मेरे लण्ड को अपने हाथ से पकड़ लिया और कहा- अरे राजा बाबू ! आप तो बहुत जवान हो गए हैं।
भाभी मेरे लण्ड को पकड़ कर सहला रही थी। मेरे लण्ड से थोड़ा थोड़ा पानी निकलने लगा। अचानक भाभी मेरे को जकड़ कर नीचे की तरफ़ घूम गई। इस से मैं भाभी के शरीर पर चढ़ गया। भाभी का शरीर बहुत ही मखमली था। भाभी ने मुझसे कहा - मुझे चोदियेगा?
मैं कहा- मैं नहीं जानता।
भाभी ने मेरे शरीर को पकड़ लिया और कहा- मैं सीखा देती हूँ, मेरा ब्लाउज खोलिए।
मैंने भाभी का ब्लाउज खोल दिया। भाभी का चूची एकदम सफ़ेद सफ़ेद दिख रहा था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि भाभी का चूची इतना सफ़ेद होगा। मैं भाभी के चूची को ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा।
भाभी ने कहा- ब्रा तो खोलिए तब ना मज़ा आएगा।
मैंने भाभी का ब्रा भी खोल दिया। अब भाभी की समूची चूचियाँ मेरे सामने तनी हुई खड़ी थी। मैंने दोनों हाथो से भाभी की चूचियों को पकड़ लिया और कहा- क्या मस्त चूचियाँ है आपकी भाभी?
मैं भाभी के चुचियों को धीरे धीरे दबा रहा था । अचानक भाभी ने कहा- मेरी साड़ी खोलिए ना ! तब और भी मज़ा आएगा।
मैंने एक हाथ से भाभी की साड़ी को खोल दिया। भाभी अब सिर्फ़ पेटीकोट में थी। फ़िर मैंने भाभी को कहा- क्या पेटीकोट भी खोल दूँ?
भाभी बोली - हाँ।
मैंने बैठ कर भाभी के पेटीकोट का नाड़ा खोला और झट से उतार फेंका। अब मेरे सामने जो नजारा था, मैं उसकी कल्पना सपने में भी नहीं कर सकता था। भाभी की बुर एकदम सफ़ेद सी थी। उस पर घने घने बाल भी थे। मैं भाभी की बुर को देख रहा था। कितनी बड़ी बुर थी। बुर के अन्दर लाल लाल छेद दिख रहा था।
मैंने भाभी को कहा- आपके भी बाल होते हैं?
भाभी सिर्फ़ मुस्कुराई। भाभी बोली - छू कर तो देखिये।
मैं भाभी की बुर को धीरे धीरे छूने लगा। भाभी की बुर के बाल एक तरफ़ कर के मैं उसे फैला के देखने की कोशिश करने लगा कि इसका छेद कितना बड़ा है। मुझे उसके अन्दर छेद तो नजर आ रहा था पर भाभी से ही मैंने पुछा- भाभी ये छेद कितना बड़ा है?
भाभी ने कहा- ऊँगली डाल के देखिये न?
मैंने बुर में ऊँगली डाल दी। मैं अपनी ऊँगली को भाभी के बुर में चारों तरफ़ घुमाने लगा। बहुत बड़ी थी भाभी की बुर। मैं बुर से ऊँगली निकाल के भाभी के शरीर पर लेट गया। भाभी ने अपने दोनों पैर को ऊपर उठा के मेरे ऊपर से घुमा के मुझे लपेट लिया। मैंने भाभी के शरीर को जोर से पकड़ लिया।
मेरी साँसे बहुत तेज़ हो गई थी। मेरी पूरी छाती भाभी की चूचियों से रगड़ खा रही थी। भाभी ने मेरे सर को पकड़ के अपने तरफ़ खींचा और अपने होंठों को मेरे होंठों से लगा दिया।
मैं भी समझ गया कि मुझे क्या करना है? मैं काफी देर तक भाभी के होठो को चूमता रहा। चूमते चूमते मेरे शरीर में उत्तेजना भरती गई। मैं भाभी के होंठ छोड़ कर कुछ नीचे आया और भाभी की चूची को मुँह में ले कर काफ़ी देर तक चूसता रहा।
भाभी सिर्फ़ गर्म साँसें फेंक रही थी। फिर भाभी अचानक बैठ गई और मुझे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। मैं लेट कर भाभी का तमाशा देख रहा था। भाभी ने मेरे लण्ड को पकड़ कर सहलाना शुरू किया। वो मेरे लण्ड के सुपाड़े को ऊपर नीचे कर रही थी। मैं पागल हुआ जा रहा था।
भाभी ने अचानक मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी। मेरा पूरा लण्ड मुंह में घुसा लिया। मैं एकदम से उत्तेजित हो गया।
मैंने भाभी को कहा- भाभी प्लीज ऐसा मत कीजिये !
लेकिन भाभी नहीं मानी। वो मेरे लण्ड को अपने मुंह में पूरा घुसा कर मज़े से चूस रही थी। अचानक मेरे लण्ड से माल निकलने लग गया। मेरी आँखें बंद हो गई। मैं छटपटा गया। मेरा सारा माल भाभी के मुंह में गिर रहा था लेकिन भाभी ने मेरे लण्ड को अपने मुंह से नहीं निकाला। और मेरा सारा माल भाभी पी गई।
२-३ मिनट के बाद मुझे होश आया। देखा भाभी मेरे शरीर पर लेटी हुआ है और मेरे होठों को चूम रही है। भाभी बोली- अरे वाह राजा जी ! अभी तो खेल बांकी है। अब जरा मुझे चोदिये तो सही।
मैं बोला- क्या अभी भी कुछ बांकी है? अब क्या करना है मुझे?
भाभी बोली- आप क्या करना चाहते हैं?
मैं बोला- जिस तरह से आपने मेरे लण्ड को चूसा उसी तरह से मैं भी आपके बुर को चूसना चाहता हूँ।
भाभी ने बिस्तर पे लेट कर अपनी दोनों टांगें अगल-बगल फैला दी। अब मुझे भाभी की बुर की एक एक चीज साफ़ साफ़ दिख रही थी। मैंने नीचे झुक कर भाभी के बुर में अपना मुँह लगा दिया। पहले तो बुर के बालों को ही अपने मुंह से खींचता रहा। फ़िर एक बार बुर के छेद पर अपने होंठ रख कर उसका स्वाद लिया।
बड़ा ही मज़ा आया। मैं और जोर से भाभी के बुर को चूसने लगा। चूसते चूसते अपनी जीभ को भाभी के बुर के छेद के अन्दर भी घुसा दिया। भाभी को देखा तो वो अपनी आँख बंद कर के यूँ कर रही थी जैसे कि कोई दर्द हो रहा है।
तभी भाभी की बुर से हल्का हल्का पानी के तरह कुछ निकलने लगा। मैंने उसका स्वाद लिया तो मुझे कुछ नमकीन सा लगा।
थोड़ी ही देर में मेरा लण्ड तन के खड़ा हो गया था। मैं भाभी के होठ को चूमने के लिए जब उनके ऊपर चढ़ा तो मेरा लण्ड उनकी बुर से सट गया। भाभी ने मेरे लण्ड को अपने हाथ से पकड़ लिया और कहा- राजा जी अब मुझे चोदिये न !
मैंने कहा- अभी भी कुछ बाकी रह गया है क्या?
भाभी धीमे से मुस्कुराई और कहा- अभी तो असली मज़ा बाकी है !
मैंने कहा- आप ही बताइए कि मैं क्या करुँ?
भाभी बोली- अब आप अपने लण्ड को मेरी बुर में डालिए।
मैंने कहा- इतना बड़ा लण्ड आपकी बुर के इतने छोटे से छेद में कैसे घुसेगा? भाभी बोली- आप डालिए तो सही !
भाभी ने अपने दोनों पैरों को और फैलाया। और मेरे लण्ड को पकड़ के अपने बुर के छेद के पास ले आई और बोली- घुसाइए !
मैंने संदेहपूर्वक अपने लण्ड को उनकी बुर के छेद में घुसाना शुरू किया।
ये क्याऽऽऽ?
मेरा सारा का सारा लण्ड उनकी बुर में घुस गया। मुझे बहुत ही मज़ा आया। भाभी को देखा तो उनके मुंह से सिसकारी निकल रही थी। मैंने झट से अपने लण्ड को उनकी बुर से बाहर निकाल लिया। भाभी ने कहा- यह क्या किया?
मैंने कहा- आपको दर्द हो रहा था ना?
वो बोली- धत ! आपके भइया तो रोज़ मुझे ऐसा करते हैं, इसमें दर्द थोड़े ही होता है, इसमें तो मज़ा आता है ! चलिए ! डालिए फ़िर से अपना लण्ड मेरी बुर के छेद में।
मैं इस बार अपने लण्ड को अपने आप से ही पकड़ कर भाभी के बुर के छेद के पास ले गया और पूरा का पूरा लण्ड उनकी बुर में घुसा दिया। भाभी के मुंह से एक बार फ़िर सिसकारी निकली। मैं उनकी बुर में अपना लण्ड डाले हुए १ मिनट तक पड़ा रहा। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करना है। मैं अपने दोनों हाथो से भाभी के चुचियों से खेलने लगा।
भाभी बोली- खेल शुरू कीजिये ना।
मैं बोला- अब क्या करना है?
भाभी बोली- चोदना शुरू कीजिये ना !
मैं बोला- अभी भी कुछ बाकी है? अब क्या करुँ?
भाभी बोली- मेरे बुध्धू राजा बाबू ! अपने लण्ड को धीरे धीरे मेरी बुर में ही आगे पीछे कीजिये।
मैं बोला- मैं समझा नहीं।
भाभी बोली- अपनी कमर को आगे पीछे कर के अपने लण्ड को मेरी बुर में आगे पीछे कीजिये।
मैंने ऐसा ही किया। अपने कमर को आगे पीछे कर के लण्ड को भाभी के बुर में अन्दर बाहर करने लगा। भाभी का शरीर ऐंठने लगा।
मैं बोला- निकाल लूँ क्या भाभी?
भाभी बोली - नही ! और जोर से चोदिये।
मैंने भाभी की कमर को अपने हाथ से पकड़ लिया और अपने लण्ड को उनकी बुर में आगे पीछे करने लगा। मुझे अब इसमें काफ़ी मजा आ रहा था। मेरा लण्ड उनकी बुर से रगड़ा रहा था। मैं पागल सा होने लगा।
५ मिनट तक करने के बाद देखा कि भाभी की बुर से पानी निकल रहा था। भाभी अब निढाल सी हो रही थी। मैंने भाभी के शरीर पर लेट कर उनकी चुदाई जारी रखी।
भाभी बोली- जल्दी जल्दी कीजिये राजा जी !
मैं बोला- कितनी देर तक और करुँ?
वो बोली- मेरा तो माल निकल गया है, आपका माल जब तक नहीं निकलता तब तक करते रहिये।
मैंने और जोर जोर से उनको चोदना जारी कर दिया। उनका सारा शरीर मेरे चुदाई के हिसाब से आगे पीछे हो रहा था। उनकी चूचियां भी जोर जोर से हिल हिल कर ऊपर नीचे हो रही थी। मुझे ये सब देखने में बहुत मज़ा आ रहा था। मैं सोच रहा था कि ये चुदाई का खेल कभी ख़तम ना हो।
तभी मुझे लगा कि मेरे लण्ड से माल निकलने वाला है। मैं भाभी को बोला- भाभी मेरा लण्ड से माल निकलने वाला है।
भाभी बोली- लण्ड को बुर से बाहर मत निकालिएगा। सब माल बुर में ही गिरने दीजियेगा।
मैंने उनको चोदना जारी रखा। १५-२० धक्के के बाद मेरे लण्ड से माल निकलना शुरू हो गया। मेरी आँख जोर से बंद हो गई। मैंने अपने लण्ड को पूरी ताकत के साथ भाभी की बुर में धकेलते हुए उनके शरीर को कस के पकड़ के उनको लिपट कर उनके ही शरीर पर गिर गया, बोला- भाभी, फ़िर माल निकल रहा है।
भाभी ने मुझे कस के पकड़ के मेरे कमर को पीछे से पकड़ कर अपने तरफ़ नीचे की ओर खींचने लगी। २ मिनट तक मुझे कुछ होश नहीं रहा।
आँख खुली तो देखा मैं अभी भी भाभी के नंगे शरीर पे पड़ा हूँ। भाभी मेरे पीठ को सहला रही थी। मेरे लण्ड से सारा माल निकल के भाभी के बुर में समां चुका था। मेरा लण्ड अभी भी उनके बुर में ही था। मैं उनके चूची पर अपने सीने के दवाब को बढ़ते हुए कहा- क्या इसी को चुदाई कहते हैं?
भाभी बोली - हाँ, कैसा लगा?
मैंने कहा- बहुत मज़ा आता है ! क्या भईया आपको ऐसे ही करते हैं?
वो बोली- हाँ, लगभग हर रात को !
मैं कहा- क्या अब मुझे आप चोदने नहीं दोगी?
वो बोली- क्यों नहीं? रात को भइया की पारी और दिन में तुम्हारी पारी।
मैंने कहा- ठीक है।
भाभी बोली- जब तुम्हें मौका नहीं मिले अपने हाथ से ही लण्ड को सहला लेना और माल निकाल लेना।
मैंने कहा- ठीक है। उसके बाद मैंने अपना लण्ड को उनकी बुर से निकाला। भाभी ने उसे अपने हाथ में लिया और कहा कि रोज़ इसमें तेल लगाया कीजिये। इस से ये और भी बड़ा और मोटा होगा।
भाभी के बुर को मैं फ़िर से सहलाते हुए पुछा- मुझे नहीं पता था कि इस के अन्दर इतना बड़ा छेद होता है।
भाभी बोली- सुनिए, कल आप अपने लण्ड के बाल को शेव कर लीजियेगा। मैं भी आज रात को शेव कर लूंगी।
तब कल फिर आपको चोदने के और भी तरीके बताऊँगी। और हाँ ! यह बात किसी को बताइयेगा नहीं।
इसके बाद भाभी ने मुझसे और भी कई तरीकों से अपनी चुदवाई कराई। आज तक किसी को इस बात का नहीं चला।

Sunday, February 5, 2017

मेरे दोस्त की बीवी

आज मैं आपके सामने एक सच्ची कहानी ले कर आया हूँ।
क्या कोई पति अपनी पत्नी को किसी और से चुदते हुआ देखना चाहेगा ?
नहीं ना !
पर ऐसा हुआ है !
मैं आज आपको ऐसी ही एक कहानी बताने जा रहा हूँ !
मेरा नाम नवीन है , मैं 29 साल का विवाहित पुरुष हूँ मेरी बीबी की उम्र 27 साल है। मैं राजस्थान में एक छोटा कस्बे झोटवाड में रहता हूँ।
मेरी शादी को चार साल हो गए हैं , मेरा वैवाहिक जीवन बहुत मस्त चल रहा है , मेरी पत्नी सुजाता मुझसे बहुत खुश है और मैं उसके साथ बहुत खुश हूँ !
मेरा एक दोस्त रचित भी मेरी ही उम्र का है। वह मेरा परम मित्र है। रचित हमेशा सेक्स की बात के लिए उतारू रहता है। हमारे जीवन की कोई बात एक दूसरे से छुपी हुई नहीं है , हम रात को क्या क्या किया , एक दूसरे को बताते हैं तो जाहिर सी बात है कि सेक्स की बात भी खुल कर ही होती है। उसको मेरी पत्नी की बदनाकृति पता है , मुझे उसकी पत्नी बबिता की कि उसके कहाँ तिल है और मेरे बीबी के कहाँ क्या है , उसको पता है। इतनी तक हम लोग बात एक दूसरे को बताते हैं। इन बातों से हम उतेजित भी हो जाते हैं जाहिर सी बात है।
घर की मुर्गी दाल बराबर ! यह कहावत तो सबने सुन ही रखी है।
एक दिन बात बात में रचित मुझे से बोला- यार नवीन , मैं हमारी सब बात बबिता को बताता हूँ ! उसको तुम्हारी सेक्स की बात सुन कर ज्यादा नशा होता है और कहती है कि नवीन भैया की तरह तुम भी मुझे चोदो ना ! तुमने मुझे नवीन भैया की सेक्स की बातें सुना सुना कर ज्यादा सेक्सी बना दिया है यार !
रचित अपनी बीवी की कहानी सुनाने लगा, वो ज्यादातर तुम्हारे लण्ड के बारे में बात करती है , मैंने तुम्हारे लण्ड का आकार बबिता को बताया है।
मैंने बीच में बात काटी , बोला- यार रचित , तुम भी क्या करते हो ? मुझे अब बहुत शर्म आ रही है , भाभी क्या सोचती होगी मेरे बारे में कि मेरा लिंग इतना बड़ा नहीं है। तुमने ऐसा क्यों किया यार? और क्या-क्या बताया है तुमने ? मुझे अब भाभी के सामने जाने में ही शर्म आएगी।
"अरे नहीं यार ! नवीन , वो तो तुम्हारे छोटे लण्ड की बात करती है , कहती है कि कितना प्यारा होगा न नवीन भैया का ? क्या तू उसके साथ सेक्स करना चाहेगा ?" एकदम रचित ने यह बात कह दी।
मैं हतप्रभ रह गया कि यह क्या बात कर रहा है। मैं कुछ नहीं बोला।
"क्या सोच रहा है नवीन ? उसे तेरे लण्ड में रूचि है , तो अगर तू कहे तो मैं बात करूँ उससे ? वैसे वो एक बार में ही मान जाएगी , ऐसा मुझे यकीन है , क्यूंकि हमारी बात होती ही रहती है। तुम्हारे और सुजाता भाभी के सेक्स की बात के साथ ही हम लोग सेक्स करते हैं और हमें मजा ऐसे ही आता है।" रचित ने कहा।
मैं सोच में पड़ गया कि क्या कहना चाहिए मुझे , हाँ या ना !
मैंने कहा- यार रचित , अभी नहीं , मैं तुझे कल जवाब देता हूँ।
ऐसा मैंने कहा और बात का विषय बदलने का प्रयास करने लगा। पर जैसे उसको अपनी पत्नी का मेरे साथ सेक्स करवाने में मजा आ रहा था। वो उस बात से नहीं हटा। "यार नवीन , बता ना ? मेरी ख़ुशी के लिए ही हाँ भर दे यार !" जब उसने ऐसा कहा तो मैंने हाँ भर दी। अगर मैं तुमको फ़ोन लगाऊँ तो तुम आ सकते हो ना ? वैसे हमारे घर एक दूसरे के घर से ज्यादा दूर नहीं थे तो कभी आया जा सकता था।
मैंने हाँ भर दी। सुजाता हमारे बीच कभी नहीं आती थी, उसको पता है कि हमारी दोस्ती क्या है।
खैर रात करीब 11.30 पर रचित का फ़ोन आया, मैंने उठाया तो वो बोला- मैदान साफ है यार ! आ जा ! आज बहुत मजे करेंगे।
वैसे मेरे बीवी ने रचित की आवाज सुन ली थी, वो बोली- क्या कह रहे थे रचित भैया? क्या कार्यक्रम है ?
मैं ऐसे ही बात को टालते हुए कपड़े पहनने लगा, मैंने कहा- मैं आता हूँ अभी रचित के यहाँ से होकर।
वो बोली- क्या हुआ ? कोई बात?
मैंने कहा- नहीं यार, थोड़ी बात करने के लिए उसने बुलाया है और थोड़ी देर में आकर सब बताता हूँ।
मैंने बात को सँभालते हुए कहा और मैं बाहर ताला लगा कर चला गया। वहाँ गया तो दोनों ने मेरा बड़ी गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। फिर हमने थोड़ा ड्रिंक किया। अक्सर हम चारों साथ बैठ कर पीते है तो कोई बड़ी बात नहीं होती है।
भाभी बोली- अरे क्या भैया , सुजाता को नहीं लाये ?
मैंने कहा- नहीं , वो सो रही है तो मैं ही आ गया।
मैंने बात को घमाते हुए कहा और तीन चार पैग लगा कर मैंने कहा- अच्छा रचित , अब मैं चलता हूँ , बहुत रात हो गई है।
तो रचित बोला- यार चल ना बेडरूम में, कोई मूवी देखते हैं।
मैं सारी योजना तो समझ रहा था पर अनजान बनते हुए मैंने कहा- नहीं यार, फिर कभी ! आज तो बहुत रात हो गई है।
इतने में भाभी बोली- क्या बात भैया आज बहुत जल्दी है ? ये कह रहे हैं तो रुक जाओ ना।
मैं रुक गया। उसने मूवी लगा दी , सेक्सी थी मूवी !
भाभी कुछ खाना लेने गई थी , वो अचानक आ गई , वो बोली- क्या कर रहे हो तुम दोनों यह ?
अनजान बनते हुए साफ उनके चहरे से दिख रहा था, पर मुझे शर्म आ गई।
"अरे डार्लिंग ! आओ न ! तुम भी देखो, मजा लो !"
मूवी में काफी अच्छा दृश्य चल रहा था। एक आदमी के साथ तीन लड़कियाँ थी , चारों मजा कर रहे थे।
यह देख कर भाभी की आह निकल गई और रचित ने उनका हाथ पकड़ कर अपनी बगल में बिठा लिया। थोड़ी देर बाद वो उनके चूचों को दबाने लगा।
भाभी बोली- क्या कर रहे हो? नवीन भैया यहाँ हैं , तुम भी ना !
रचित बोला- यार नवीन देखो ना , तुम्हारी भाभी की कैसी चूचियाँ हैं छोटी-छोटी ! मुझे ज्यादा मजा नहीं आता है यार ! तुम इस मामले में किस्मत वाले हो ! सुजाता भाभी के बहुत अच्छे हैं यार !
मैंने कहा- तुमने कब देख लिए?
वो बोला- नहीं , तुमने जैसा बताया, उससे बोल रहा हूँ और यूँ भी तो पता लग ही जाता है यार ! तू भी ना ! चल तुझे छोटी चूचियाँ अच्छी लगती हैं तो ले , मेरे बीवी के साथ मजा कर ले , ले दबा ले इसकी।
मुझे बड़ी शर्म आ रही थी और वो बहुत सहज भाव से यह बात करता जा रहा था !
भाभी भी बोली- क्या बात कर रहे हो रचित तुम ?
वो बोला- यार, अब नाटक मत करो, तुम दोनों को पता है कि क्या हो रहा है और तुम्हें एक दूसरे में रुचि भी है तो फिर क्यों समय ख़राब करते हो?
और मेरा हाथ पकड़ कर भाभी के वक्ष पर रख दिया, खुद उठ कर उधर दूसरी तरफ चला गया। अब हम दोनों के बीच में भाभी थी, एक चूची रचित दबा रहा था और एक मैं दबा रहा था।
वो बोला- अब ऐसे मजा नहीं आ रहा है !
और वो भाभी को नंगा करने लगा , मैंने भी उसका सहयोग किया।
अब मेरा भी लिंग खड़ा हो गया था, आखिर दूसरी औरत का मजा लेने का मौका और वो भी उसके पति के सामने ऐसा अनुभव तो बड़ा रोमांचक होता है।
मेरे सामने अब भाभी पूरी नंगी थी , मुझे बहुत मजा आ रहा था। रचित खुद काफी रोमांचित हो रहा था, मुझे सब कुछ सपने जैसा लग रहा था। मैं और जोश से भाभी के स्तन दबा रहा था और उनको मुँह में लेकर चूसता भी जा रहा था।
भाभी बहुत उत्तेजित हो गई , वो कहने लगी- अब नहीं सहा जाता है अब आ भी जाओ नवीन भैया ! एक बार दर्शन तो करा दो अपने लिंग के !
मैंने जल्द ही अपने सारे कपड़े उतार दिए। भाभी मेरा लिंग देख कर काफी उत्तेजित हो गई और उसे मुँह में ले लिया।
रचित बोला- अरे यह क्या ? मेरा लेने में तो नाटक करती है और इसका बड़े मजे से ? क्या बात है यार?
"अरे, तुम नहीं जानते , नवीन भैया के लिंग की कहानी तुमने सुना सुना कर मुझे बहुत परेशान का रखा था, आज जब मेरे सामने खुद आ गया है तो यह तो क्या , मैं इसको चोदूंगी। मैं तुम्हारे साथ भी करुँगी , पहले मेहमान का तो स्वागत कर लूँ।"
"हाँ-हाँ ! क्यों नहीं यार ! मैं तो मजाक कर रहा था।" रचित बोला।
और भाभी ने इस कदर मेरे लण्ड के साथ खेल किया कि मैं ज्यादा देर तक मैदान में नहीं टिक सका और मैं बोला- भाभी , मैं झड़ने वाला हूँ , हटा लो अपना मुँह !
भाभी कुछ नहीं बोली और करती रही।
मैं बोला- अब नहीं रुका जाता है भाभी ! आह...
रचित बोला- यार हो जाने दे , उसको यह सब बहुत अच्छा लगता है। मेरे साथ भी कभी कभी ऐसा ही करती है यह !
मैं भाभी के मुँह में झड़ गया। भाभी ने मेरा सारा वीर्य अंदर उतार लिया और बोली- बहुत अच्छा है नवीन भैया का तो ! मजा आया ! आज बहुत मजा आया ! आओ अब तुम्हारा भी चूसती हूँ !
और भाभी ने रचित का मुँह में लेकर एक दो बार ही किया था कि रचित भाभी के मुँह में ढेर हो गया। भाभी ने उसका भी वीर्य अंदर गटक लिया।
भाभी मेरे लिंग को देख रही थी- यार रचित , कितना बढ़िया है ना नवीन भैया का लिंग?
रचित बोला- तुम तो मना कर रही थी? तो कैसे देख पाती इसका यह रूप > तब हम फिर सेक्सी मूवी देखने में लग गए , फिर से मेरा कड़क हो गया।
भाभी ने मेरा लिंग अपने हाथ में लिया हुआ था तो उनको अहसास हो गया- रचित देखो, तुम तो अभी तक ऐसे ही पड़े हो, नवीन भैया तो फिर से तैयार हो गए हैं।
और इतना बोल कर उसने फिर से मेरे लिंग को मुँह में ले लिया , मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया।
वो बोली- अब इसका नम्बर है क्या?
मैंने कहा- हाँ भाभी , अब चूत का मजा लेने दो !
मैं अब खुल चुका था !
मैंने भाभी को लिटाया और अंदर डाल दिया।
भाभी बोली- वाह , क्या अच्छा है तुम्हारा लिंग , दर्द भी नहीं हुआ और कितना प्यारा अहसास हो रहा है। इनका तो मुझे ज्यादा अच्छा नहीं लगता। रचित , बुरा मत मानना पर अब मैं कभी कभी नवीन भैया के साथ सेक्स करुँगी।
रचित बोला- मेरे जान मैं तो यही चाहता हूँ कि तुम रोज ही मेरे सामने इसके साथ सेक्स करो और मैं तुम दोनों को ऐसे ही देखता रहूँ ! मुझे तुम्हारी ख़ुशी चाहिए मेरी जान !
अब मैंने थोड़ी गति बढ़ा दी तो भाभी बोली- क्या बात है भैया, कहीं जाना है क्या? थोड़ी देर तक तो रुको , अंदर होने का मजा तो लेने दो !
अब रचित ने भी हाथ से हिला कर खड़ा कर लिया था वो भी अब जोश मे आ गया था। उसने अपना लंड भाभी के मुँह में डाल दिया और बोल- यार बबिता , मेरा बरसों का सपना था कि तुम ऐसे मेरे सामने दूसरे से चुदो और मैं बस ऐसे मजा करूँ तुम्हारे मुँह में डाल कर !
भाभी बोली- क्यों नवीन भैया, एक बात बोलूँ? अगर तुम बुरा न मानो तो !
मैंने कहा- बोलो भाभी , मैं तुम्हारी बात का कैसे बुरा मान सकता हूँ ? वैसे एक सच बताऊँ भाभी , मैं सुजाता को चोद चोद कर बोर हो चुका था ! जैसे मेरा तुम्हारे सामने थोड़ी देर में दो बार खड़ा हो गया न , ऐसे मेरा कभी सुजाता के सामने नहीं होता है।
बीच में बात काट कर रचित बोला- अरे क्या बात करता है यार नवीन ? सुजाता भाभी का क्या बदन है यार ! क्या चीज है यार वो ! आई लव हर !
भाभी बीच में बात काट कर बोली- यार नवीन भैया , क्यों न हम चारों साथ में सेक्स करें? ये तुम्हारी बीवी को और तुम मुझे ! कितना मजा आएगा।
मैं घबरा गया , मैंने कहा- यार रचित , सुजाता नहीं मानेगी। मुझे नहीं लगता कि वो मानेगी।
"अरे, तुम चिंता मत करो !" भाभी बोली ," मैं उसको मना लूंगी ! मैं जानती हूँ कि वो कितना पसंद करती है इनके लण्ड को !"
मैंने कहा- मतलब ?
तो भाभी बोली- जैसे तुम दोनों दोस्त आपस मे बात करते हो, कोई बात नहीं छुपाते हो, ऐसे ही हम दोनों भी तो सहेलियाँ हैं न , तो हम भी तुम्हारे लंड के बारे में बात करते हैं और मैं तुम्हारे लण्ड की बात सुनती थी, दो-दो बार , एक तो सुजाता से और एक इनके मुँह से ! तो मेरा क्या हाल होता था आप जान ही सकते हैं। मुझे आपका लण्ड इतना प्यारा लगा कि कभी मुँह से न निकालूँ और जब भी तुम्हारा वीर्य निकले तो उसको अपने मुँह में ले लूँ बस ! और मैंने सुजाता की भी ऐसे ही तड़प देखी है। अगर तुमको यकीन न हो तो आज बात करके देखना , वो ज्यादा न-नुकर नहीं करेगी और इनके लंड के बारे में बात करने लगेगी।
"वैसे भाभी , मैंने भी बात की हुई है रचित के लण्ड के बारे में ! बात तो वो बहुत ही ध्यान से सुनती है और आगे कुछ पूछती भी है पर मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि वो इससे चुदना चाहती है।" मैंने बताया।
बीच में बात काट कर रचित बोला- अरे क्या बात करता है यार नवीन ? सुजाता भाभी का क्या बदन है यार ! क्या चीज है यार वो ! आई लव हर !
भाभी बीच में बात काट कर बोली- यार नवीन भैया , क्यों न हम चारों साथ में सेक्स करें? ये तुम्हारी बीवी को और तुम मुझे ! कितना मजा आएगा।
मैं घबरा गया , मैंने कहा- यार रचित , सुजाता नहीं मानेगी। मुझे नहीं लगता कि वो मानेगी।
"अरे, तुम चिंता मत करो !" भाभी बोली ," मैं उसको मना लूंगी ! मैं जानती हूँ कि वो कितना पसंद करती है इनके लण्ड को !"
मैंने कहा- मतलब ?
तो भाभी बोली- जैसे तुम दोनों दोस्त आपस में बात करते हो, कोई बात नहीं छुपाते हो, ऐसे ही हम दोनों भी तो सहेलियाँ हैं न , तो हम भी तुम्हारे लण्ड के बारे में बात करते हैं और मैं तुम्हारे लण्ड की बात सुनती थी, दो-दो बार , एक तो सुजाता से और एक इनके मुँह से ! तो मेरा क्या हाल होता था आप जान ही सकते हैं। मुझे आपका लण्ड इतना प्यारा लगा कि कभी मुँह से न निकालूँ और जब भी तुम्हारा वीर्य निकले तो उसको अपने मुँह में ले लूँ बस ! और मैंने सुजाता की भी ऐसे ही तड़प देखी है। अगर तुमको यकीन न हो तो आज बात करके देखना , वो ज्यादा न-नुकर नहीं करेगी और इनके लण्ड के बारे में बात करने लगेगी।
"वैसे भाभी , मैंने भी बात की हुई है रचित के लण्ड के बारे में ! बात तो वो बहुत ही ध्यान से सुनती है और आगे कुछ पूछती भी है पर मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि वो इससे चुदना चाहती है।" मैंने बताया।
"यार नवीन भैया , तुम भी ना ! कोई भी औरत ऐसा अपने मुँह से अपने पति से नहीं कह सकती है कि मैं उस आदमी से चुदना चाहती हूँ , जैसे मैं तुमसे चुदना चाहती थी पर मैंने कभी इनको अहसास नहीं होने दिया कि मैं क्या चाहती हूँ , वैसे इनका भी ऐसा मन था कि मैं किसी दूसरे मर्द के साथ भी सेक्स का मजा लूँ तो ऐसा अपने आप ही हो गया नहीं तो ऐसा हो पाना मुश्किल था। तुम भी जानते हो ना !
ऐसे ही बात चलती रही और मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करता रहा। भाभी पूरे जोश में आ चुकी थी, वो अब तक दो बार झड़ चुकी थी।
मैंने कहा- भाभी , मेरा तो बस अब होने वाला है।
तो वो बोली- ऐसे ही मत कर देना ! मुझे वीर्य पीना है।
और मैंने अपना लण्ड निकाल कर भाभी के मुँह में कर दिया। थोड़ी देर तक मुँह में हिलाता रहा तब जाकर मेरा हुआ।
भाभी पूरा का पूरा लण्ड मुँह में लेकर झूम रही थी। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था तो मैं भी धक्के लगा रहा था। भाभी ने मेरी एक एक बूंद चाट ली।
अब बारी रचित की थी, रचित बोला- जान, मुझे भी थोड़ा मजा दोगी क्या ?
भाभी बोली- अब तो सारा मजा सुजाता ही देगी तुमको !
मैंने भी अपना सर हाँ में हिला दिया- हाँ रचित , अब सुजाता के साथ मजा करना ! मैं अब भाभी को तुमको नहीं देने वाला !
मैंने ऐसे ही मजाक में कहा।
"देख ले , फिर मैं भी सुजाता भाभी को तुझे हाथ नहीं लगाने दूँगा।" रचित ने कहा।
मैंने कहा- अच्छा बाबा , आ जा !
और वो भाभी को पीछे के तरफ से डाल कर थोड़ा हिला और बाहर निकाल कर भाभी के मुँह में कर दिया। उसका भी भाभी ने अंदर गटक लिया- आज तो मजा आ गया तुम दोनों का वीर्य पी कर ! मेरा तो पेट भर गया।
उसके बाद मैं घर के लिए रवाना हुआ। मेरे दिमाग में अजीब से ख्याल आ रहे थे, अगर सुजाता पूछेगी तो क्या कहना है , वगैरह ! और उन दोनों से जो वादा किया है सुजाता को रचित से चुदाने का ! यह बात कैसे करूँगा ? ऐसे ही सोचते हुए मैं घर आ गया
घण्टी बजाई तो वो उठ कर आ गई , मैंने कहा- तुम सोई नहीं क्या अभी तक ?
वो बोली- नहीं यार, नींद नहीं आ रही थी, तुम्हारी याद आ रही थी। आज बहुत मन है मेरा !
"मेरे तो हाथ पैर ढीले हो गए ," मैंने कहा ," यार मेरा मन नहीं है।"
वो नहीं मानी , उसने मेरे कपड़े खोल दिए और खुद भी नंगी हो गई और मेरा लण्ड निकाल कर मुँह में ले लिया तो वो बोली- यह क्या? आज तो तुम्हारे लण्ड से वीर्य की खुशबू आ रही है।
मैंने सब सच बताने की ठानी , इसी बहाने आगे की बात भी हो जाएगी , मैं बोला- वो छोड़ो डार्लिंग ! आओ मेरे पास !
और मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी और आराम से बात करने लगा।
मैंने कहा- यार मैं एक बात कहूँ, तुम बुरा तो नहीं मानोगी ?
वो बोली- नहीं बोलो !
"कसम खाओ !"
वो बोली- कसम से !
मैंने कहा- क्या तुम किसी और लण्ड का मजा लेना चाहती हो? सच सच बताना ?
वो थोड़ा शरमा गई और कुछ नहीं बोली।
मैंने कहा- तुमने वादा किया है !
वो बोली- नहीं !
"सच बोलो ! तुमको मेरी कसम !"
वो बोली- हाँ पर !मैंने कहा- रचित के लण्ड का तुमको पता ही है ना !
वो झुंझला कर बोली- मेरे को कैसे पता?
मैंने कहा- बबिता भाभी ने मुझे सब बता दिया है कि तुम दोनों हमारे लण्ड की बात करती हो , जैसे हम दोनों रचित और मैं करता हूँ ऐसे !
सुजाता बोली- तुम भी ऐसी बातें करते हो ?
मैंने कहा- हाँ !
और फिर मैं शुरू हो गया , एक हाथ से उसके चूचे दबा रहा था और एक हाथ उसकी चूत में था। वो मस्त हो रही थी , रचित का लम्बा लण्ड लेकर तुम मस्त होना चाहती हो न ? सच बताओ ?
उसने हाँ कहा।
उसकी हाँ से मेरा मुरझाये हुए लण्ड में थोड़ा जान आ गई , उसके हाथ भी उसको सहला रहे थे।
और फिर हम रचित के लण्ड की बात करने लगे। मेरा खड़ा हो गया , मैंने बात बात में कहा, आज हमने रचित के यहाँ जो किया वो उसको सुना दिया।
वो चौंक गई- अरे !
और मैंने कहा- कल तुमको भी रचित से चुदवा दूँगा ! घबराओ मत !
और हम लोग आराम से सेक्स करने लगे। तीसरा दौर था तो मेरा निकल ही नहीं रहा था, सुजाता मस्त हो रही थी। मेरा लण्ड रचित के लण्ड के ख्याल में खोई हुई मस्त हो रही थी और मैं मस्त धक्के दे रहा था।
वो दो बार झड़ गई , बोली- ओह नवीन , आज तो तुमने बहुत मजा दिया , क्या किया। आज बबिता भाभी ने जो तुम को इतना जोश आया?
"कल देखना रचित कैसे तुमको चोदता है ! अब मुझे और सुजाता को भी ऐसे बात करने में मजा आने लगा और फिर मैंने कहा- यार, मैं झड़ने वाला हूँ !
और मैंने अपना सारा वीर्य अंदर चूत में ही गिरा दिया।
मैंने रात को ही रचित को फोन किया- लाइन साफ़ है , कल का कार्यक्रम तय है भाई ! और फोन सुजाता के कान में लगा दिया।
वो बोला- ठीक है भाई, कल देख तू तेरे बीवी को कैसे चोदता हूँ। वो बोलेगी कि मजा आ गया , ऐसा कभी नवीन ने कभी नहीं किया ऐसा जोरदार सेक्स ! कल भाभी की चूत को सही लण्ड मिलेगा।
"ठीक है , बाय यार ! कल मिलते हैं , कल चोद लेना जितना चोदना हो अपनी भाभी को !
आने वाले कल का जोश सब के सर चढ़ कर बोल रहा था।
मैंने रात को ही रचित को फोन किया- लाइन साफ़ है , कल का कार्यक्रम तय है भाई ! और फोन सुजाता के कान में लगा दिया।
वो बोला- ठीक है भाई, कल देख तू तेरे बीवी को कैसे चोदता हूँ। वो बोलेगी कि मजा आ गया , ऐसा कभी नवीन ने कभी नहीं किया ऐसा जोरदार सेक्स ! कल भाभी की चूत को सही लण्ड मिलेगा।
"ठीक है , बाय यार ! कल मिलते हैं , कल चोद लेना जितना चोदना हो अपनी भाभी को !
आने वाले कल का जोश सब के सर चढ़ कर बोल रहा था।
सवेरे हम अपने काम पर निकल गए , शाम को सबको रचित के घर जमा होना था, खाना भी वहीं था और पीना भी !
हमने साथ बैठ कर शराब पी और मस्ती का दौर चालू हो गया।
मैं रचित के लण्ड पर हाथ लगा कर बोला- देखो सुजाता , रचित का !
और रचित ने भी मेरा लण्ड पकड़ लिया।
सुजाता शरमा गई। फिर भाभी आ गई- हटो , मैं मजा लूंगी नवीन के साथ तो !
रचित हट गया , मैंने सुजाता के भी कपड़े खोलने शुरू कर दिए और साथ ही मैं बबिता भाभी को भी चूम रहा था।
जैसे ही मैंने सुजाता की ब्रा खोली, रचित बोला- वाह भाभी ! आपके चूचे क्या माल हैं !
वो उनके ऊपर झुक गया उनको ऐसे चूमने लगा जैसे उसने पहली बार चूचियाँ देखी हों।
बबिता भाभी भी नंगी हो गई।
हम सब नंगे थे। सुजाता ने जैसे ही रचित के लण्ड के हाथ लगाया , वो बोली- वाह ! इसको कहते हैं लण्ड ! यार नवीन , धन्यवाद यार ! तुम जैसा पति सबका होना चाहिए। भाभी बोली- नहीं सुजाता , रचित जैसा पति ! इन्हीं का चमत्कार है कि हम दोनों एक दूसरे के पति से चुद रही हैं।
सुजाता ने रचित का लण्ड मुँह में ले लिया और इधर भाभी ने भी मेरा लण्ड मुँह में ले लिया। आज मैं ऐसा नजारा देख कर जल्दी झड़ने वाला था, मैंने कहा- भाभी मैं झड़ने वाला हूँ !
"आने दो भैया ! मैं तुम्हारे वीर्य की प्यासी हूँ !"
सुजाता ने उसको ऐसा करते हुए देखा तो बोली- यह क्या भाभी ?
भाभी ने कहा- ऐसा तो बहुत अच्छा लगता है , एक बार तुम भी रचित का पीकर देख लो , अच्छा लगे तो आगे करना नहीं लगे तो कोई बात नहीं।
फिर क्या था , सुजाता ने रचित का लण्ड मुँह में ले लिया और बड़े मजे से चूसने लगी। इधर भाभी भी मेरा लण्ड मुँह में लेकर बहुत अलग अहसास दे रही थी।
थोड़ी देर में मैं भाभी के मुँह में झड़ने लगा। उधर रचित सुजाता के मुँह में !
सुजाता ने रचित का सारा वीर्य पी लिया। थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे।
फ़िर हमने खाना खाया ऐसे ही नंगे ! बस थोड़ा बहुत तन को ढक रखा था। खाने से ज्यादा ध्यान एक दूसरे की ओर था।
मैं और रचित तो ऐसे ही खाना खा रहे थे। सुजाता ने खाना खाते हुए रचित का लण्ड हाथ में ले लिया।
खैर हम खाने से निबट कर फिर बिस्तर पर थे।
इस बार अपनी अपनी बीवी के साथ सेक्स शुरू कर रहे थे, दोनों को मजा आ रहा था क्योंकि माहौल ही सेक्सी था। थोड़ी देर हमने ऐसे ही किया। फिर बीवियों को बदल कर करने लगे।
दोनों खुश थी- अब आया मजा हमको ! अपने अपने पसंद का लण्ड मिल गया है।
ऐसे ही कई महीनों तक चलता रहा , फिर हम बोर होने लगे हमको और कुछ नया चाहिए था !
एक दिन रचित बोला- यार, अब मजा कम हो गया है ! क्यों न हम विशाल को भी इस खेल में शामिल कर लें ?
विशाल हमारा दोस्त है।
मैंने कहा- ठीक है , पर वो मान जायेगा क्या?
रचित ने कहा- हाँ, मान जायेगा। मेरी उसके साथ भी खुली बात होती है , तो वो जरूर मान जाएगा , ग्रुप सेक्स का उसको भी शौक है।
मैंने कहा- ठीक है ! यार, उसकी बीबी बहुत हॉट है , साथ में मिल कर चोदेंगे , मजा आएगा और वो हमारी बीवियों को चोदेगा।